सोमवार, 25 मई 2026

ਚੀਚੀ ਤੇ ਲਾ ਰੱਤ ,ਸ਼ਹੀਦ ਨਹੀਂ ਬਣ ਸਕਦੇ
ਰਣ ਤੱਤੇ ਵਿੱਚ ਮੋਮ ਦੇ ਬੁੱਤ ਨਹੀਂ ਖੜ੍ਹ ਸਕਦੇ।

ਉੱਲਰ ਉੱਲਰ ਉਲਾਰੂ ਸੋਚ
ਉੱਲਰਦੀ ਵਾਲੇ।
ਸੱਚ ਦੇ ਸ਼ੀਸ਼ੇ ਸਨਮੁੱਖ ਪਲ ਨਾ ਅੜ ਸਕਦੇ।

ਅਫਰਾ ਤਫਰੀ ਗ਼ਦਰ ਮਚਾਉਣਾ ਔਖਾ ਨਹੀਂ 
ਸੂਝ ਸੁਚੱਜੀ ਕ੍ਰਾਂਤੀ ਸਭ ਨਹੀਂ ਘੜ ਸਕਦੇ।

ਬਿਨੁ ਮਿਹਨਤ ਹੀ ਪਾਸ਼ ਕਲੋਨੀ ਕਬਜ਼ਾਉਣੇ।
ਮੂਲ ਮਿਹਨਤੀ ਦੇ ਸੁਫ਼ਨੇ ਨਹੀਂ ਘੜ ਸਕਦੇ।

ਅਕਲਾਂ ਵਾਲਿਓ ,ਕਲਮਾ ਵਾਲਿਓ ,ਸੋਚ: ਲਿਖੋ. 
ਦਬੜੂ ਘੁਸੜੂ ਕਲਮ ਕਾਰ ਨਹੀਂ ਬਣ ਸਕਦੇ ।

ਦੀਪ ਜ਼ੀਰਵੀ

रविवार, 24 मई 2026

दीप इक ने की रौशनी?

मैं चुप ही सही ,मैं चुप ही सही हूं।
मैं वो बात हूं ,आज तक अनकही हूँ।।

अंधेरे में अक्सर अंधेरे को छू कर
अंधेरे की अंधी कसम खा रही हूं।

मेरे पास है माल ज़र और जवानी।
मै नीयत हूं कब साफ सुथरी रही हूं।

मैं धारा हूँ सूखी किसी बे जुबां की
किसी की कलम से मैं अक्सर बही हूँ।

हुआ नाम दीप इक ने रौशन किया सब
मैं बाती हूँ जो रौशनी को जली हूं

दीप ज़ीरवी 

गुरुवार, 21 मई 2026

Dil...


दिल दिल है शीशा नहीं 
शीशे से भी नाजुक दिल ।

ये दिल दिल का साथी है 
ये दिल दिल का है कातिल ।


यार तुम्हारी बात कहू 
यार तुम्ही तो हो मेरे ।


तुम्ही हो जीवन मेरा ,
तुम्ही जीवन का हासिल ।

तेरे दिल की कहता हू 
तेरे दिल की सुनता हु
मेरे दिल की जाने न, 
क्यों हो मुझ से तू गाफिल
Deep Zirvi 

मंगलवार, 27 नवंबर 2012

...और तू है

 प्यार तेरा,बात तेरी याद  है बस  और तू है ;


साथ ना तू , पास तेरा प्यार है बस ...और तू है .

जैसे  मेरे देश में हैं बढ़ रहे ये  रोग शोक  ;


दिन ब दिन वैसे ही मन में  प्यार है बस ...और तू है .
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गुरुवार, 15 दिसंबर 2011

यह जाम तुम्हारी आँखों के..


यह जाम तुम्हारी आँखों के ,वह जाम उठाने न देते ;
तेरे गेसू तेरी चितवन ,मयखाने जाने न देते .

वो मादक मोहक अंगड़ाई ,जब हाथ उठा कर लेते हो ;
तन-मन पर जादू  छा जाए , यह तन-मन होश गंवा लेते .

मखमल से कोमल 'तन -मांसल ',और मन 'अतिकोमल भाव 'सा है ;
मैं जाम उठाऊँ भी तो क्या ,ये होश में आने न देते .


मयखाना मेरे पहलू में ,तो मैं मयखाने क्यों जाऊं
जिनको जाना हो वो जाएँ ,हम उनको ताने न देते 
दीप जीरवी
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रात आप सपने में आए ;

 

रात आप सपने में आए ;
पलकों की कुटिया के नीचे
रखा आप को गले लगाए
रात आप सपने में आए.

-०-०-०-०-०-
आप थे ,मैं था,सांवली चुप थी
रात सलोनी सी गुपचुप थी ;
रात गई कर तारा तारा

आप में हम तो रहे समाए 
रात आप सपने में आए ;

-०-०-०-०-०--०-०-
पूनम रात में पूनम चाँद ही
था पहलू में मेरे लेटा
बदल ओट से पूनम चाँद ने
मेरे पूनम चाँद को देखा ;
देखा ,देख देख शर्माए
रात आप सपने में आए ;

-०-०-०-०-०-०-०-
 चन्दन चन्दन सब मनभावन
कंचन कंचन बदन सुहावन
तन कंचन व् मन चन्दन सा
सुकुचाते से तुम थे आए
रात आप सपने में आए ;
-०-०-०-०-०-०-०-
दीप जीरवी

रविवार, 11 दिसंबर 2011

महक उठेगी रात की रानी

महक उठेगी रात की रानी

तेरी वेणी में सज कर ही.

चंदनिया शीतल हो गी पर

तेरी काया से लग कर ही .





सुमन सुशोभित हों उप वन में

तेरे आँचल के छूते ही

मानस तल पर विविध छटाएं

बिखरें तुम को छू पल भर ही .



मन मयूर करे नृत्य सुहाना

पुलकित होता हर्षाता है

जब छाते हैं कुंतल

बस तेरे मुख के नभ पर ही



मन की सीमा से आगे भी

देखो कई असीम गगन हैं

सोच विहग है आतुर पल पल

मेरा मन सुख के पथ पर ही .

दीप ज़ीरवी 9815524600

मंगलवार, 15 नवंबर 2011

तेरी तस्वीर में शोखी , अदा है बलवा है ;


तेरी तस्वीर में शोखी , अदा है बलवा है ;
और तुझ में वफा है मुहब्बत का जलवा है
तेरी तस्वीर की रंगीनिया खो जाएँ भी;
उम्र का असर मुहब्बत पे न हो पाए गा;
हो गी ये नौजवान बरस बरस बीतें गे ,
हो गी ये नौजवान सरस सरस भीगें गे ;
'दिल नगर' आ के जरा देख लो अहिस्ता से
अपने रहने की जगह कितनी है शाइस्ता ये .
ख्वाब शीशे से भी नाज़ुक से हुआ करते है ;
इसलिए तुम से ये कहने से हम डरते हैं .
मेरी इस बात से वो ऐसे खफा न हो जाए ;
मेरी उस बात से वो  वैसे खफा न हो जाए.
अब तो उस के सिवा मैं  जाऊं भी कहाँ जाऊं
वो नजर आए है मुझ को जाऊं मैं जहाँ जाऊं   
 तेरी तस्वीर में शोखी , अदा है बलवा है ;
और तुझ में वफा है मुहब्बत का जलवा है
दीप जीर्वी 9815524600

सोमवार, 14 नवंबर 2011

...साथ मगर तू हो

तन्हाई भी शहनाई हो ;साथ अगर तू हो.
अंगड़ाई पे अंगड़ाई ही ;साथ अगर तू हो .

सरगम सरगम साँस बने और हो धडकन पे ताल ;
चंदनिया भी शर्माई हो;साथ अगर तू हो .

ज़ुल्फ़ रुपेहिली ढांपे गोरा मुखड़ा तेरा... हो ;
इश्क जवानी गदराई हो ;साथ अगर तू हो .

तेरी चंचल चितवन ,मोहक नयन नशीले दो ;
महकी महकी महकी पुरवाई हो ;साथ अगर तू हो

प्रीत ना जाने रीत, जमाना अपने ठेंगे पे ;
चर्चा चाहे रुसवाई हो; साथ मगर तू हो
दीप जीर्वी 9815524600 .

बुधवार, 9 नवंबर 2011

मैं तुझे ओढ़ता बिछाता रहू
तुम से तुम को सनम चुराता रहू .
तू मेरी ज़िन्दगी है जान.ए.गज़ल
ज़िन्दगी भर तुझे ही गाता रहू.
तुम यूँही मेरे साथ साथ चलो ,
मैं जमाने के नभ पे छाता रहू .
गुल जो पूछे कि महक कैसी कहो?
तेरी खुशबु से मैं मिलाता रहू .
ऐ मुहब्बत नगर की देवी सुनो ,
तेरे दर पर दीप इक जलाता रहू